चलो लोकतंत्र को बचाते हैं !

लगता है हाथ में तिरंगा और संविधान लेकर लोकतंत्र को अपमानित करने का नया प्रचलन चल पड़ा है। कुछ मुट्ठी भर लोग यह तय करने चल पड़े हैं कि भारत का संविधान खतरे में है। विरोध के नाम पर भीड़ की मनमानी तनिक भी सहने योग्य नहीं है।विरोध के नाम पर सड़क को बाधित करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है।मेरा चयन जब एक शिक्षक के रूप में हुआ तो पैसे ना देने के कारण मुझे घर से दूर विद्यालय आवंटित किया गया था। पैसे देने वालों को उनके घर के पास में ही विद्यालय दिया गया इसका तात्पर्य बिल्कुल नहीं था कि मैं सड़क पर धरने पर बैठ जाऊं।मुझे विरोध करने का अधिकार है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मेरे कारण दूसरों को असुविधा हो।लेकिन यहां पर तो नागरिकता कानून का विरोध करने का कोई प्रश्न ही नहीं है, यह प्रदर्शन नहीं बल्कि एक विशुद्ध राजनीति है। शाहीन बाग का प्रदर्शन पूर्ण रूप से प्रायोजित हैं। यदि मैं सरकार से असहमत हूं इसका तात्पर्य यह बिल्कुल नहीं है कि मुझे सामान्य लोगों को परेशान करने का अधिकार मिल जाता है। ऐसे कार्यों से यह भीड़तंत्र अपनी तानाशाही दिखा रही है। और कुछ फर्जी बुद्धिजीवी ऐसे विरोध प्रदर्शनों को लोकतंत्र के रक्षक बताने पर लगे हुए हैं।अगर इस भीड़ पर कल पुलिस लाठी चार्ज कर दे तो चारों ओर से आलोचनाओं की बौछार होने लगेगी लेकिन यह कोई भी समझने को तैयार नहीं है कि आप इस तरीके से सामान्य नागरिकों को असुविधा पहुंचा रहे हैं जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। दिल्ली के साहीनबाग में भीड़ महीनों से रास्ता रोककर खड़ी है। स्कूल ,कॉलेज, कार्यालय, अस्पताल सब जगह जाने वालों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह धरना नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में नहीं हैं बल्कि यह धरना सरकार के विरोध में हैं। कुछ कट्टरपंथी लोग ऐसे विरोध प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।

वर्तमान में हम ऐसे भारत में रह रहे हैं जहां पर प्रधानमंत्री को मारने की बात कहना अभिव्यक्ति की आजादी है तथा देश के गद्दारों को मारने की बात कहना लोकतंत्र का अपमान। अब आप ही तय करें क्या सही है क्या गलत।जब धर्म विशेष के लोगों को हज के नाम पर सब्सिडी दी जा रही थी तब भारत का लोकतंत्र खतरे में नहीं था और यदि आज पड़ोसी देशों के धर्म के आधार पर सताए हुए अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता देने की बात की जा रही है तो यह संविधान की हत्या करार दिया जा रहा है। हमें यह समझना होगा कि धर्मनिरपेक्षता का दिखावा देश को ले डूबेगा।

सेक्युलरिज्म की बात करने वालों को देश के इतिहास को अच्छे से पुनः पढ़ने की आवश्यकता है क्योंकि आज जहां पर पाकिस्तान और बांग्लादेश है वह भी कभी भारत के अंतर्गत ही था। यदि यही हाल चलता रहा तो एक दिन वर्तमान भारत का भी बंटवारा होना तय है। भारत के फर्जी बुद्धिजीवियों ने हिंदुओं में आतंकवादियों की तलाश कर ली लेकिन जहां पर आतंकी फैक्ट्री स्थित है उसके जड़ को बताने में लगता है कि इनके जबान में जंग लग गई है।

विरोधियों का यह उन्माद है जो आज खुलकर सरकार के सामने आ रहा है और यह सरकार से तनिक भी डरने को तैयार नहीं है। अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करने वाले इन लोगों से जब तारेक फतह, तस्लीमा नसरीन और सलमान रशदी के अभिव्यक्ति के बारे में बात की जाती है तो इस प्रकार मौन साध लेते हैं जैसे लगते हैं कि जीभ काट दी गई हो।झारखंड के लोहदरगा में CAA समर्थक रैली पर पथराव में एक युवक की मौत हो गई। उसके बारे में यह तथाकथित फर्जी बुद्धिजीवी बात नहीं करेंगे लेकिन उसके विरोधियों की रैली में किसी को चोट भी आ जाए तो यह लोकतंत्र की दुहाई देने लगते हैं।

कुछ जड़ बुद्धि पत्रकारों ने तो लगता है ऐसी घोषणा कर दी है कि दिन-रात मोदी को गाली देना ही असली पत्रकारिता माना जाएगा।हाल यह है कि यदि सरकार का विरोध करने वाला देश का भी विरोध करें तो भी ये लोग उसका समर्थन करते हैं। एक सिरफिरे ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी तो उस पर घंटो घंटो स्पेशल कवरेज दिखाते रहें लेकिन एक गद्दार ने असम को देश से काटने की बात कही तो उस पर इनका एक मिनट का भी एपिसोड नहीं आया। कुछ पत्रकारों को लग रहा है कि भारत का विपक्ष अच्छे से कार्य नहीं कर पा रहा है तो क्यों ना उसकी जिम्मेदारी हम ही निभाए और अवश्य यह लोग अघोषित रूप से विपक्ष का कार्य कर रहे हैं जिनमें मैग्सेसे वाला बिहारी पत्रकार इन लोगों का अगुवा जान पड़ता है।

बड़े ही निर्लज्जता से यह लोग अपना एजेंडा चलाने में व्यस्त हैं ऐसे कृत्यों को करने में शर्म भी नहीं आती है ।इन्हें लगता है कि सरकार का विरोध एक साहस का कार्य है और ऐसा कार्य करने के कारण पत्रकारिता के इतिहास के पन्नों में इनका नाम स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा।भाजपा शासित राज्य में यदि किसी को सिर दर्द भी हो जाए तो यह उसका जिम्मेदार वहां के मुख्यमंत्री और मोदी को बताने लगते हैं लेकिन गैर भाजपा शासित राज्य में यदि कोई बड़ी दुर्घटना भी हो जाए तो इनका मुंह बंद ही रहता है।गौरी लंकेश की हत्या कांग्रेस शासित कर्नाटक राज्य में होती है लेकिन उसके लिए भी यह संघ को जिम्मेदार ठहराते हैं।

भाजपा यदि कहती है कि कांग्रेस पाकिस्तान की भाषा बोलती है तो इसमें कुछ भी आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि आए दिन इनके मणिशंकर अय्यर जैसे नेता पाकिस्तान में जाकर वहां से मोदी के खिलाफ जहर उगलने का कार्य लगातार करते रहते हैं। तीन तलाक, आर्टिकल 370, 35A, पत्थरबाजों के विरुद्ध अभियान आदि विषयों पर पाकिस्तान और कांग्रेस की राय लगभग एक समान रही है। इन्हें अपने देश के जवानों की चिंता नहीं रहती है लेकिन पत्थरबाजों के साथ पूरी सहानुभूति रखते हैं।जैसे पाकिस्तान कहता है कि कश्मीर का मसला यूनाइटेड नेशन में है उसी प्रकार से कांग्रेस में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि यह मामला अभी UN में है अतः आप इसको नहीं हटा सकते।विपक्षी भाजपा का विरोध करते करते देश का भी विरोध करने लगते हैं इसी प्रकार अपने देशद्रोही होने का परिचय दे देते हैं।

आगे शाहिनबाग की नकाबपोश वीरांगनाओं के बारे में भी कुछ चर्चा कर लेना उचित है।इन्हें कैसी आजादी चाहिए पता ही नहीं चलता है। पैसे लेकर आजादी का राग अलापने वाली इन नकाबपोशों को तीन तलाक, पर्दा, अशिक्षा आदि से आजादी की मांग करनी चाहिए। इन लोगों को लगता है कि रास्ता रोककर लोगों की सुविधाओं में बाधा पहुंचाकर ही अपनी देशभक्ति का परिचय दिया जा सकता है।

 

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