गुप्त वंश का संस्थापक कौन था?

गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था।
श्रीगुप्त ने गुप्त वंश की स्थापना 240 ई. में की। वह  280 ई. तक राजा रहा। श्रीगुप्त के बाद घटोत्कच राजा बना। गुप्त वंश का प्रथम महान शासक चंद्रगुप्त प्रथम था। चंद्रगुप्त प्रथम ने  लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया तथा महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।

समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त प्रथम के बाद  335 ई. में राजा बना। समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के 9 शासकों और दक्षिणावर्त के 12 शासकों को पराजित किया।समुद्रगुप्त को अपने जीवन काल में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा इसी कारण उसे भारत का नेपोलियन कहा जाता है। समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति का लेख उत्कीर्ण करवाया।

समुद्रगुप्त को संगीत प्रेमी माना जाता है। सिक्कों पर समुद्रगुप्त को वीणा वादन करते हुए पाया गया है। समुद्रगुप्त को कविराज भी कहा जाता है। समुद्रगुप्त ने विक्रमंक की उपाधि धारण की थी।
समुद्रगुप्त का उत्तराधिकारी चंद्रगुप्त द्वितीय हुआ जिसे विक्रमादित्य भी कहा जाता है।

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य 380 ईसवी में राजा बना। चंद्रगुप्त द्वितीय के समय ही प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान भारत आया था। गुप्तकालीन शासक कुमारगुप्त ने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। गुप्त काल में उज्जैन महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था।

भारत में सर्वप्रथम किसी के सति होने का प्रमाण 510 ई. के भानुगुप्त के एरण अभिलेख में मिलता है जिसमें किसी भोजराज की पत्नी के सती होने का उल्लेख मिलता है। गुप्त काल में वेश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं के लिए गाणिका का शब्द का प्रयोग किया गया है। गुप्तकालीन शासक वैष्णव धर्म के अनुयायी थे। कालिदास गुप्तकालीन साहित्यकार हैं।

 

 

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