नंद वंश का संस्थापक कौन था ?

नंद वंश का संस्थापक  महानंदिन था ।
नंद वंश का प्रथम प्रमुख शासक महापद्मनंद था। वह एक शूद्र दासी पुत्र था। सभी ऐतिहासिक स्त्रोतों से यह तथ्य निश्चित है कि वह एक अत्याचारी,शक्तिशाली और समृद्ध सम्राट था। पुराणों में उसे सर्वक्षत्रान्तक कहा गया है जिसका तात्पर्य है सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला। इससे यह स्पष्ट है कि वह शूद्र ही था।

महापदम नंद की मृत्यु के बाद घनानंद शासक बना। घनानंद के समय ही भारत के पश्चिमी सीमावर्ती छोटे राज्यों पर सिकंदर का आक्रमण हुआ था। घनानंद के के पास एक शक्तिशाली सेना थी। माना जाता है कि नंद वंश की शक्तिशाली सेना से डरकर ही सिकंदर के सैनिकों ने व्यास नदी को पार करने से मना कर दिया था।

कालांतर में चंद्रगुप्त मौर्य ने घनानंद को मारकर मगध में मौर्य वंश की स्थापना की। चंद्रगुप्त मगध की राज गद्दी पर 322 ईसा पूर्व में बैठा।

घनानंद को हराने में चाणक्य ने चंद्रगुप्त का साथ दिया था।
पहले चाणक्य घनानंद के दरबार में ही रहता था। किंतु घनानंद ने चाणक्य का अपमान किया था जिसके कारण चाणक्य ने नंद वंश का विनाश करने का निश्चय किया। चाणक्य कालांतर में चंद्र गुप्त का मुख्य सलाहकार बना और श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ सिद्ध हुआ। चाणक्य ने अर्थशास्त्र नामक पुस्तक लिखी जिसमें राजनीति के बारे में विस्तृत वर्णन मिलता है। चाणक्य के अन्य नाम विष्णुगुप्त तथा कौटिल्य है।

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