सत्यशोधक समाज के संस्थापक कौन है?

सत्यशोधक समाज के संस्थापक ज्योतिबा फूले  हैं। इसकी  स्थापना 24 सितंबर सन् 1873 मे हुई । सत्य अर्थात सच की खोज करने वाला समाज ही सत्यशोधक समाज कहलाता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी उनके विचारों से ज्यादा प्रभावित रहते थे। सत्यशोधक समाज का  प्रमुख उद्देश्य धार्मिक सांस्कृतिक कार्यों में पुरोहितों की अनिवार्यता को खत्म करना, शूद्रो अति शूद्रो को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना, सामूहिक हितों की प्राप्ति के लिए अपने में एकता के भाव को पैदा करना, धर्म एवं जाति पर आधारित कष्टों से लोगों को मुक्ति दिलाना, पढ़े लिखे शूद्रो अति शुद्र युवाओं के लिए प्रशासनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर को प्रदान करना आदि था।

एक बार ज्योतिबा फूले जी को अपने एक ब्राम्हण मित्र की शादी में जातिगत भेदभाव के कारण बुरी तरह अपमानित होना पड़ा। पिताजी से इसका कारण पूछने पर पता चला कि सदियों से यही सामाजिक व्यवस्था है और हम उनकी बराबरी नहीं कर सकते क्योंकि वह ऊंची जाति के लोग हैं और हम नीची जाति के हैं। फूलेजी सोचने लगेकी  अगर सभी जीवो को भगवान ने बनाया है तो मनुष्य मनुष्य में भेदभाव क्यों हैं? कोई ऊंची जाति और कोई नीची जाति का कैसे हो सकता है? अगर हमारे समाज में इतनी समानताएं व छुआछूत है तो यह परम सत्य नहीं बल्कि यह असत्य है। यदि यह असत्य है तो मुझे सत्य की खोज करना ही पड़ेगा और समाज को बताना ही पड़ेगा। इस प्रकार एक संगठन के रुप में  सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फुले जी के द्वारा की गई।

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