शुंग वंश का संस्थापक कौन था?

शुंग वंश का संस्थापक  पुष्यमित्र शुंग था । शुंग वंश की उत्पत्ति के बारे में कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलता है। माना जाता है कि शुंग उज्जैन  से संबंधित थे और इनके पूर्वज मौर्यों की सेवा में लगे हुए थे।

पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके 150 ईसा पूर्व में मगध में शुंग वंश की स्थापना की। पुष्यमित्र शुंग बृहद्रथ का सेनापति था तथा वह ब्राह्मण जाति का था।

पुराणों के अनुसार पुष्यमित्र शुंग अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या करके राजा बना था। किंतु बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान के अनुसार पुष्यमित्र अंतिम मौर्य सम्राट था।

शुंग शासकों की राजधानी विदिशा थी। पुष्यमित्र शुंग ने दो बार अश्वमेध यज्ञ किया था। पुष्यमित्र के लिए यह यज्ञ पतंजलि ने करवाए थे। अशोक ने यज्ञ आदि कार्यों में पशु बलि पर रोक लगा दिया था लेकिन पुष्यमित्र के काल में पशु बलि फिर से प्रारंभ हो गया।

पुष्यमित्र के समकालीन पतंजलि के महाभाष्य से हमें पता चलता है कि पुष्यमित्र को यवनों के आक्रमण का भी सामना करना पड़ा। चित्तौड़ के निकट माध्यमिका नगरी और अवध में  पुष्यमित्र का सामना यवनों से हुआ और उसने यवनों को पराजित कर दिया।

दिव्यावदान के अनुसार पुष्यमित्र शुंग का साम्राज्य पश्चिमोत्तर में साकल(सियालकोट) तक विस्तृत था।

बौद्ध ग्रंथों के अनुसार पुष्यमित्र शुंग ने कई बौद्धों को मरवा दिया था। वह कट्टर ब्राह्मण तथा तथा बौद्ध धर्म का विरोधी था।वह बौद्ध धर्म की अहिंसावादी नीति को राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा मानता था।कनिष्क का मानना था कि बौद्धों के भेष में यवन विदेशी उनके मठ में रहते हैं जो पश्चिमी सीमा प्रांत प्रदेशों के लिए खतरा है।

यद्यपि शुंगवंशीय राजा ब्राह्मण धर्म को मानने वाले थे किंतु उनके शासनकाल में भरहूत स्तूप का निर्माण और सांची स्तूप की वेदिकाओं का बनाया जाना बौद्धों के आरोपों का खंडन करता हुआ प्रतीत होता है। सांची स्तूप का निर्माण अशोक के समय हुआ था।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हो सकता है कुछ बौद्धों ने पुष्यमित्र का विरोध किया हो जिसके कारण पुष्यमित्र को इस प्रकार की दमनात्मक कार्यवाही करनी पड़ी हो।

पुष्यमित्र शुंग के बाद उसका पुत्र अग्निमित्र राजा बना उसके बाद वसुमित्र। कालिदास के मालविकाग्निमित्र के अनुसार  यवनों को सिंधु नदी के तट पर पुष्यमित्र के पोते वसुमित्र ने पराजित किया था।

शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था जिसने 73 ई. पूर्व तक शासन किया .

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